दिलों में ज़रा फ़रवरी आने दो !

भावनायें जो नदियों की तरह बहा करती थीं , बर्फ़ सी जमी हैं सीनों में , इंसानियत की परिभाषा बदल सी गयी है, राजनीति और

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